IND vs ENG: मैनचेस्टर टेस्ट के बाद ‘भिड़’ गए गंभीर और स्टोक्स, इस बात को लेकर अलग-अलग हुए रास्ते

भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच और इंग्लैंड की टेस्ट टीम के कप्तान बेन स्टोक्स मैनचेस्टर टेस्ट मैच के बाद इस बात पर अलग-अलग रास्ते पर चल दिए हैं। ये ऐसी बात है जो इस टेस्ट मैच में सामने आई लेकिन काफी दिनों से इसे लेकर चर्चा हो रही थी।

इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स और भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने टेस्ट क्रिकेट में चोटिल खिलाड़ियों के रिप्लेसमेंट को लेकर बिल्कुल अलग-अलग राय दी। स्टोक्स ने जहां इस चर्चा को बेतुका करार दिया, वहीं गंभीर ने इस तरह के नियम की खुलकर वकालत की।

यह सवाल मैनचेस्टर टेस्ट में ऋषभ पंत की चोट के संदर्भ में पूछा गया, जहां पंत ने टूटे हुए पैर के साथ बल्लेबाजी तो की, लेकिन विकेटकीपिंग की स्थिति में नहीं थे। उनकी जगह ध्रुव जुरैल ने विकेट के पीछे जिम्मेदारी संभाली।

बेतुकी है बात

स्टोक्स ने कहा कि मुझे लगता है कि चोट के कारण रिप्लेसमेंट को लेकर इतनी चर्चा होना बिल्कुल बेतुका है। अगर चोट के रिप्लेसमेंट की इजाजत दी गई तो बहुत सारी खामियां होंगी, जिनका टीमें फायदा उठा सकती हैं। आप जब मैच के लिए 11 खिलाड़ी चुनते हैं तो चोटों की संभावना उसी का हिस्सा होती है। मुझे लगता है कि इस बहस को यहीं खत्म कर देना चाहिए।

वहीं, मुख्य कोच गौतम गंभीर ने स्टोक्स की राय से असहमति जताते हुए कहा कि गंभीर चोट की स्थिति में रिप्लेसमेंट की अनुमति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं इसके पक्ष में हूं। अगर अंपायर और मैच रेफरी को लगता है कि खिलाड़ी को गंभीर चोट लगी है और ये साफ दिखाई दे रहा है तो रिप्लेसमेंट की इजाजत मिलनी चाहिए। इसमें कुछ गलत नहीं है, खासकर ऐसी सीरीज में जो इतनी कड़ी टक्कर की रही हो। आगे गंभीर ने कहा कि सोचिए अगर हमें 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ता, 11 के विरुद्ध तो ये हमारे लिए कितना दुर्भाग्यपूर्ण होता।

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